Showing posts with label निरखो न शिकारी की नज़रों से. Show all posts
Showing posts with label निरखो न शिकारी की नज़रों से. Show all posts

Tuesday, December 6, 2016

निरखो न शिकारी की नज़रों से/नचिकेता

Image result for नचिकेता
नचिकेता जी का एक गीत जो आशाओं की धरती देता है ...टूटे मन और विश्वास को शब्दों के संबल प्रदान कर रहा है ..........साथ ही चेता रहा है कि यदि सुख चैन चाहिए तो दुनिया में जीवन सम्बलों को बचाना होगा

दुनिया को
निरखो न शिकारी की नज़रों से

वैसे तो दुनिया में ढेरों
रंग भरे हैं
यहाँ खेत
खलिहान, नदी, पर्वत, दर्रे हैं
इन्हें बचाना होगा ज़ालिम
राहबरों से

यहाँ महकते फूल
चमकते मुक्त पखेरू
दूध-भरे थन चूस रहे हैं
भूखे लेरू
इन्हें नहीं डर है
आने वाले ख़तरों से

जीना मुश्किल है
फिर भी दुनिया सुन्दर है
रूप, गंध, स्पर्श, ध्वनि
रस का आकर है
मत नोंचो
परवाज़ स्वप्न के
खुले परों से ।


नचिकेता