Tuesday, December 6, 2016

अम्मा तुम तो /धीरज श्रीवास्तव

प्रस्तुत कर्ता/ राजेश कुमारी
सरल शब्द सरल भाव पाठकों के दिल तक पँहुच जमींन से जुड़े इनके गीतों की पहचान है जो आपकी संवेदना को जीते हैं मेरी संवेदना को जीते हैं घर घर की संवेदना को जीते हैं यही ख़ासियत है इनके गीतों की ,गीतों के उस जादूगर से आपको भी रूबरू करवाना चाहूँगी,जी हाँ आप के लिए लाई हूँ धीरज श्रीवास्तव का ये गीत ---

अम्मा तुम तो चली गई पर
लाल तुम्हारा झेल रहा!

जैसे तैसे घर की गाड़ी
अपने दम पर ठेल रहा!
बैठ करे पंचायत दिन भर
सजती और सँवरती है!
जस की तस है बहू तुम्हारी
अपने मन का करती है!
कभी नहीँ ये राधा नाची
कभी न नौ मन तेल रहा!

राधे बाबा का लड़का तो
बेहद दुष्ट कसाई है!
संग उसी के घूमा करता
अपना छोटा भाई है!
सोचा था कुछ पढ़ लिख लेगा
उसमेँ भी ये फेल रहा!

खेत कर लिया कब्जे मेँ है
बोया उसमेँ आलू है!
लछमनवा से मगर मुकदमा
वैसे अब तक चालू है!
जुगत भिड़ाया तब जाकर वो
एक महीने जेल रहा!

चलो कटेगा जैसे भी अब
आशीर्वाद तुम्हारा है!
और भरोसा ईश्वर पर है
उसका बहुत सहारा है!
खेल खिलाता वही सभी को
और जगत ये खेल रहा


धीरज श्रीवास्तव