Thursday, December 8, 2016

लम्बी दौड़ लगा देता है/ सर्वेश त्रिपाठी


                           


हार जीत , सुख दुःख, सफलता असफलता की ज़मीन पर ही अनुभवों की इमारत खड़ी होती है ........ अस्वीकार इमारत को कमज़ोर करता है ........सब कुछ झोली में सहेज कर एक सबक की तरह स्वीकार कर जो हार के बाद भी उठकर अगले प्रयास की ओर और दृढ़ता से अग्रसर होता है असल में वही विजेता कहलाता है ..........नई पीढी के सक्षम रचनाकार सर्वेश त्रिपाठी का एक गीत इन्ही सकारात्मक भावों को लिए हुए आज आप सब के समक्ष

अक्सर गिरा हुआ ही उठकर
लम्बी दौड़ लगा देता है
अपनी ही नज़रों में गिरना
ऊपर और उठा देता है

जब कोई छोटी सी गलती
जीवन में दुःख भर जाती है
अपनी कमियाँ अपनी त्रुटियाँ
रह रह मन को मथ जाती हैं
आंधी का वह झोंका तब ही
सारे दोष उड़ा देता है

असफलता की प्रबल टीस को
कर्म और आशा में भरकर
होंठो पर मुस्कान बिखेरे
जो चलते रहते हैं पथ पर
आसमान भी उनकी खातिर
अपना शीश झुका लेता है

हुई हार पर रोते रहना
भला कहीं कुछ दे पाया है?
बिना कर्म के क्या ईश्वर भी
इस धरती पर रह पाया है?
अपने मन को मार बैठना
जीवन-धार सुखा देता है

जब दुनिया पर दोष न देकर
मन खुद को दोषी कहता है
यह क्षण ही मानव जीवन में
कर्म और दृढ़ता भरता है
आंसू गिर गिर कर नयनों से

सारी पीर बहा देता है